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- हेमाद्रि संकल्प और उससे जुड़े अनुशासन - देवता कौन होते हैं? देवता इनसान होते हैं। कैसे इनसान होते हैं? जैसे हमारे बुजुर्ग थे। यहाँ देवता निवास करते थे।
- हेमाद्रि संकल्प और उससे जुड़े अनुशासन - जिसको देवता कहते हैं। देवता कौन होते हैं? देवता इनसान होते हैं। कैसे इनसान होते हैं? जैसे हमारे बुजुर्ग थे। यहाँ
- हेमाद्रि संकल्प और उससे जुड़े अनुशासन - सकता है, जिसको देवता कहते हैं। देवता कौन होते हैं? देवता इनसान होते हैं। कैसे इनसान होते हैं? जैसे हमारे बुजुर्ग
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- अध्यात्म का वास्तविक स्वरूप - गन्दगी नहीं करेंगी। यह खास बात है। देवता कौन होते हैं? जिनके अन्दर से बेटे, विकृतियाँ उत्पन्न नहीं होतीं। जो गन्दगी
- अध्यात्म का वास्तविक स्वरूप - वे गन्दगी नहीं करेंगी। यह खास बात है। देवता कौन होते हैं? जिनके अन्दर से बेटे, विकृतियाँ उत्पन्न नहीं होतीं। जो
- अध्यात्म का वास्तविक स्वरूप - पर वे गन्दगी नहीं करेंगी। यह खास बात है। देवता कौन होते हैं? जिनके अन्दर से बेटे, विकृतियाँ उत्पन्न नहीं होतीं।
- हेमाद्रि संकल्प और उससे जुड़े अनुशासन - प्राप्त कर सकता है, जिसको देवता कहते हैं। देवता कौन होते हैं? देवता इनसान होते हैं। कैसे इनसान होते हैं? जैसे
- अध्यात्म का वास्तविक स्वरूप - दीजिए, पर वे गन्दगी नहीं करेंगी। यह खास बात है। देवता कौन होते हैं? जिनके अन्दर से बेटे, विकृतियाँ उत्पन्न नहीं
- हेमाद्रि संकल्प और उससे जुड़े अनुशासन - प्रमोशन प्राप्त कर सकता है, जिसको देवता कहते हैं। देवता कौन होते हैं? देवता इनसान होते हैं। कैसे इनसान होते हैं?
- हेमाद्रि संकल्प और उससे जुड़े अनुशासन - और प्रमोशन प्राप्त कर सकता है, जिसको देवता कहते हैं। देवता कौन होते हैं? देवता इनसान होते हैं। कैसे इनसान होते
- हेमाद्रि संकल्प और उससे जुड़े अनुशासन - सकता है, एक और प्रमोशन प्राप्त कर सकता है, जिसको देवता कहते हैं। देवता कौन होते हैं? देवता इनसान होते हैं।
- हेमाद्रि संकल्प और उससे जुड़े अनुशासन - कौन होते हैं? देवता इनसान होते हैं। कैसे इनसान होते हैं? जैसे हमारे बुजुर्ग थे। यहाँ देवता निवास करते थे। देवता
- बहुदेववाद को समझें, भ्रम-जंजाल में न उलझें - जंजाल में न उलझें - कौन थे? ये ब्राह्मण थे। ब्राह्मण देवता थे। ब्राह्मण देवता हैं? हाँ, देवता होते थे। देवता कौन? जिन्होंने मुट्ठी भर अनाज
- बहुदेववाद को समझें, भ्रम-जंजाल में न उलझें - जंजाल में न उलझें - ये कौन थे? ये ब्राह्मण थे। ब्राह्मण देवता थे। ब्राह्मण देवता हैं? हाँ, देवता होते थे। देवता कौन? जिन्होंने मुट्ठी भर
- बहुदेववाद को समझें, भ्रम-जंजाल में न उलझें - जंजाल में न उलझें - देवता अर्थात् ‘भूसुर’। ये कौन थे? ये ब्राह्मण थे। ब्राह्मण देवता थे। ब्राह्मण देवता हैं? हाँ, देवता होते थे। देवता कौन?
- बहुदेववाद को समझें, भ्रम-जंजाल में न उलझें - जंजाल में न उलझें - ब्राह्मण देवता थे। ब्राह्मण देवता हैं? हाँ, देवता होते थे। देवता कौन? जिन्होंने मुट्ठी भर अनाज खाया; जिन्होंने फटे-पुराने कपड़े पहने;
- बहुदेववाद को समझें, भ्रम-जंजाल में न उलझें - जंजाल में न उलझें - ब्राह्मण थे। ब्राह्मण देवता थे। ब्राह्मण देवता हैं? हाँ, देवता होते थे। देवता कौन? जिन्होंने मुट्ठी भर अनाज खाया; जिन्होंने फटे-पुराने
- बहुदेववाद को समझें, भ्रम-जंजाल में न उलझें - जंजाल में न उलझें - ये ब्राह्मण थे। ब्राह्मण देवता थे। ब्राह्मण देवता हैं? हाँ, देवता होते थे। देवता कौन? जिन्होंने मुट्ठी भर अनाज खाया; जिन्होंने
- प्रवचन, गीत, फोल्डर और पुस्तकें — Discourses, Songs, Folders and Books - रुप में कब से खत्म हो गए। हम एक व्यक्ति हैं? नहीं हैं। हम कोई व्यक्ति नहीं हैं। हम एक सिद्धान्त
- वर्तमान पर्यावरण परिदृष्य—एक विनम्र प्रयास-समाधान - समाधान - है, उससे उसकी महत्ता ही नहीं, सत्ता का भी समापन होते दीखता है। संचित बारूद के ढेर में यदि कोई पागल
- वर्तमान पर्यावरण परिदृष्य—एक विनम्र प्रयास-समाधान - समाधान - चिन्तन को धुआँधार विकृतियों से भरते क्यों चले जा रहे हैं? निकट भविष्य के सम्बन्ध में मूर्द्धन्य विचारक यह भविष्यवाणी कर
- वर्तमान पर्यावरण परिदृष्य—एक विनम्र प्रयास-समाधान - समाधान - हो क्यों रहा है एवं कैसे हो रहा है? इसे कौन करा रहा है? आखिर वह चतुराई कैसे चुक गई, जो